69000 मामला: समझौते के चरण में बेंच क्यों बदली गई?
69000 शिक्षक भर्ती का विज्ञापन 2018 में निकला था। 2026 में भी मामला तय नहीं हुआ है। 2026 के मध्य में ऐसा लग रहा था कि एकमुश्त समझौते से विवाद ख़त्म हो सकता है। फिर पीठ बदल गई, और अब मामला नए सिरे से गुण-दोष पर सुना जा रहा है।
यह लेख एक सवाल दर्ज करता है। यह उसका जवाब नहीं देता, क्योंकि जवाब हमें पता नहीं है। तथ्य 6 अक्टूबर 2026 तक के हैं। पूरा घटनाक्रम टाइमलाइन वाले लेख में है।
समझौता कितना क़रीब था
| तारीख | रिकॉर्ड में क्या है | स्रोत |
|---|---|---|
| 4 फ़रवरी 2026 | "We have indicated our mind to learned counsel appearing for the State." यानी कोर्ट ने राज्य के वकील को अपना रुख बता दिया | लिखित आदेश |
| 4 फ़रवरी 2026 | न्यायमूर्ति दत्ता ने पूछा कि क्या 6,800 को समायोजित किया जा सकता है, "6,800 से ज़्यादा भी" | आजतक की रिपोर्ट |
| 18 फ़रवरी 2026 | राज्य "actively considering the matter, as per the observations made by this Court", यानी कोर्ट की टिप्पणियों के अनुसार मामले पर सक्रिय रूप से विचार कर रहा है | लिखित आदेश |
| 19 मई 2026 | राज्य नई सूची में आने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्त करने को "ready and willing"। शर्तें: रिक्तियाँ, न्यूनतम योग्यता, और इसे नज़ीर न माना जाए। छह हफ़्ते का समय | लिखित आदेश |
| 20 जुलाई 2026 | राज्य का हलफ़नामा, 8,270 नामों की सूची के साथ | प्रसारित संलग्नक |
| 28 जुलाई 2026 | पक्षकार सुझाव भेजें। कोर्ट तय करेगा कि विवाद ख़त्म करने के लिए अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल हो या गुण-दोष पर सुनवाई | लिखित आदेश |
बदलाव
- 28 जुलाई 2026 तक पीठ की अध्यक्षता न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता कर रहे थे।
- 4 अगस्त 2026 से मामला न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ के सामने है।
- किसी आदेश या आधिकारिक बयान में इसका कारण नहीं बताया गया है।
दो बातें साथ में कहना ज़रूरी है। पहली: 19 मई 2026 के आदेश में ही लिखा था कि मामला "not part-heard" है और उसे "the regular Bench" के सामने सूचीबद्ध किया जाए। दूसरी: कौन-सा मामला किस पीठ के पास जाएगा, यह तय करना मुख्य न्यायाधीश का प्रशासनिक अधिकार है। यानी यह बदलाव एक सामान्य रोस्टर बदलाव भी हो सकता है।
उसके बाद क्या बदला
- नई पीठ ने 9 सितंबर 2026 को मामलों को आठ श्रेणियों में बाँटा और हर श्रेणी को गुण-दोष पर सुन रही है।
- सुनवाई की तारीख़ें: 8 और 9, 16, 22 से 24, 29 और 30 सितंबर, तथा 6 अक्टूबर 2026। अगस्त के बाद से पहले के मुक़ाबले ज़्यादा सुनवाइयाँ हुई हैं।
- 30 सितंबर तक आरक्षित वर्ग के प्रतिवादी और राज्य अपनी पूरी बहस नहीं कर पाए थे।
- अनुच्छेद 142 पर दो टिप्पणियाँ रिपोर्ट हुई हैं। दोनों सिर्फ़ ब्लॉगों में हैं, किसी लिखित आदेश में नहीं, और दोनों अलग दिशा में जाती हैं:
- 8 सितंबर: "Article 142 can't be used in deviation of law" (एक टिप्पणीकार के अनुसार)
- 29 सितंबर: "we have the power under 142, we can think about it" (एक ब्लॉग के अनुसार)
- किसी स्रोत में यह नहीं बताया गया कि सुनवाई के कितने दिन बाक़ी हैं।
सवाल
- राज्य के प्रस्ताव और अनुच्छेद 142 पर कोर्ट की बात के बाद पीठ क्यों बदली?
- इसका कारण क्या था, और उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
- अगर मामला उसी पीठ के पास रहता, तो क्या विवाद जल्दी ख़त्म हो जाता?
- हर अतिरिक्त महीने की क़ीमत कौन चुकाता है?
साफ़ शब्दों में: कोई आधिकारिक कारण प्रकाशित नहीं हुआ है, और इस लेख को इन सवालों के जवाब नहीं पता। हम किसी न्यायाधीश की नीयत पर कोई सवाल नहीं उठा रहे हैं।
अभ्यर्थी क्या माँग रहे हैं
- बदलाव का कारण सार्वजनिक किया जाए।
- बाक़ी बहस के लिए समयबद्ध कार्यक्रम तय हो।
- फ़ैसला आए, चाहे जिस पक्ष में आए।
स्रोत
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश: 19 मई 2026, 9 सितंबर 2026, 30 सितंबर 2026
- आजतक, 4 फ़रवरी 2026
- ब्लॉग (इन्हें दावे के रूप में पढ़ें): 8 सितंबर की सुनवाई, 29 सितंबर की सुनवाई, 6 अक्टूबर की सुनवाई